Posts

अपनी तलाश

कहीं गुम हो  क्यों गुम हो  कोई तो बात होगी  नहीं!! कुछ सच का छुपाना  कुछ हल्के से झूठी हंसी का मुस्कुराना  कहो तो ,, कोई तो बात होगी  नहीं !!  फिर अंधेरे में कौन छिप गया  देखो तो फिर से मेरा मौन छिप गया  झूठी हंसी यूं मुस्कुराना क्यों  हम खुश है ,, ये दुनिया को बताना क्यूं  खफा होने दो उनको  जुदा होने दो उनको  फिर सवालों के अंधेरे में मै खोया  कहो तो आज फिर कौन रोया । अंधेरी गलियों में सूना मन  भटक गया है ये जीवन  पर कहां भटका । सांसों का मंज़र कहां लटका  दीवारों में कालिख लगी है  मै भी पराया हो गया कोई तो समझना चाहा हमको  पता नही कितना समझ पाया मुझको सवालों के घेरे में मै खड़ा  उदासी का हर घूट पीता रहा  फिर भी गुमसुम मुस्कुराता रहा कहो तो ,,आज क्या हुआ  न जाने कैसे मुझसे हुआ भागा दूर घर से दौड़कर चलकर  हवा में उड़कर  पहुंच गया उस अंधेरे में उस दरख़्त के नीचे जमाने से दूर खुद से दूर एक सूनसान जहां पर  जहा न कोई पहचाने मुझको न कोई जाने मुझको  बस साथ है उस अंधे...

बेरुखी

अजब सी बेरुखी है ,, उनके बर्ताव में ।। कांच के जैसे तोड़ देते है,, दिल हमारा प्यार में ।। कोई गीले शिकवे नहीं हैं,, हम दोनों के प्यार में ।। सांसे रुक जाती हैं ,, इस मजधार में ।।

meri mohabbat

##  Meri mohabbat ## रहो न तुम यूं बेचैन ,, न रातों में इतना सताया करो । कभी कभी तो हमारे , गली भी आया करो ।। ख्वाबों में आती हो हर रोज़ , कभी कभी तो हमारे सामने भी आ जाया करो । तुम्हारा यूं जाना हमे गवारा नहीं लगता ,, कभी कभी तो हमसे भी नजरें मिलाया करो ।। कभी कभी ..... आंखें खुली हो या बंद ,, खयाल तुम्हारा रहता है हरदम।। सपनों की दुनिया को अपना बनाया हमने ,, कभी तो हमारे घर की वेल बजाया करो ।। कभी कभी तो......... खुद से ज्यादा चाहते है तुमको , बस यूं न हमे तड़पाया करो ।। चांद सूरज ला के तो नहीं दे पाएंगे हम तुमको,, बस शुर्ख होठों से ही मुस्कुराया करो हरदम।। प्यार का पैमाना तो नहीं होता,, बस दिल की धड़कनों को समझ जाया करो ।। कभी कभी....  दुनिया कुछ भी बोले हमको , तुम देते रहना साथ हरदम ।। कसम हम मोहब्बत की खाते है ,, साथ निभायेंगे हरदम , हरपल, हर जनम।। जिस शहर में होगा आशियाना अपना ,, उस शहर को अपना बनायेंगे।। कसम है उस रब की ,, तुमको न कभी छोड़कर जायेंगे ।। साथ रहेंगे और साथ निभायेंगे ।। कभी कभी....

कहानी इश्क़ की

ये कौन सी बात है?? हमें पहले ही पता था कि  तुम हो ही नहीं मेरे ।  फिर आयी ही क्यूं इतने करीब तुम मेरे ।  बात गर नाराज़गी की होती  तो हम माफ़ भी कर देते ।  दिल पर गहरा ज़ख़्म करके  यूं पतझड़ सा न बनते ।  माना इश्क़ तुमसे किया हमने  ये तो जमाने की बात है ।  तुम तरस भी न खाओ ये कौन सी बात है ? ,,,,,,,