अपनी तलाश

कहीं गुम हो 
क्यों गुम हो 
कोई तो बात होगी 
नहीं!!
कुछ सच का छुपाना 
कुछ हल्के से झूठी हंसी का मुस्कुराना 
कहो तो ,, कोई तो बात होगी 
नहीं !! 
फिर अंधेरे में कौन छिप गया 
देखो तो फिर से मेरा मौन छिप गया 
झूठी हंसी यूं मुस्कुराना क्यों 
हम खुश है ,, ये दुनिया को बताना क्यूं 
खफा होने दो उनको 
जुदा होने दो उनको 
फिर सवालों के अंधेरे में मै खोया 
कहो तो आज फिर कौन रोया ।
अंधेरी गलियों में सूना मन 
भटक गया है ये जीवन 
पर कहां भटका ।
सांसों का मंज़र कहां लटका 
दीवारों में कालिख लगी है 
मै भी पराया हो गया
कोई तो समझना चाहा हमको 
पता नही कितना समझ पाया मुझको
सवालों के घेरे में मै खड़ा 
उदासी का हर घूट पीता रहा 
फिर भी गुमसुम मुस्कुराता रहा
कहो तो ,,आज क्या हुआ 
न जाने कैसे मुझसे हुआ
भागा दूर घर से
दौड़कर चलकर 
हवा में उड़कर 
पहुंच गया उस अंधेरे में
उस दरख़्त के नीचे
जमाने से दूर खुद से दूर
एक सूनसान जहां पर 
जहा न कोई पहचाने मुझको
न कोई जाने मुझको 
बस साथ है उस अंधेरे का 
जहां खोया मै एक सूनसान सा ।
चिर स्पंदन रहा सताता मुझको
बेध रहा अंधेरा मुझको 
समझ न पाया मै उसको 
अंदर से आवाज है आई !!!
कहां खोया है मेरे भाई ,,
उठ देख नया सूरज निकला
नया सबेरा आया ।।
देख तेरे लिए ......देख तेरे..
तेरा भाई कुछ लाया 
ले कुछ खा ले 
चल उठ थोड़ा मुस्कुरा ले ।।
हवा का रुख बदल गया 
जमाना फिर से बदल गया।

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