meri mohabbat
## Meri mohabbat ##
रहो न तुम यूं बेचैन ,,
न रातों में इतना सताया करो ।
कभी कभी तो हमारे ,
गली भी आया करो ।।
ख्वाबों में आती हो हर रोज़ ,
कभी कभी तो हमारे सामने भी आ जाया करो ।
तुम्हारा यूं जाना हमे गवारा नहीं लगता ,,
कभी कभी तो हमसे भी नजरें मिलाया करो ।।
कभी कभी .....
आंखें खुली हो या बंद ,,
खयाल तुम्हारा रहता है हरदम।।
सपनों की दुनिया को अपना बनाया हमने ,,
कभी तो हमारे घर की वेल बजाया करो ।।
कभी कभी तो.........
खुद से ज्यादा चाहते है तुमको ,
बस यूं न हमे तड़पाया करो ।।
चांद सूरज ला के तो नहीं दे पाएंगे हम तुमको,,
बस शुर्ख होठों से ही मुस्कुराया करो हरदम।।
प्यार का पैमाना तो नहीं होता,,
बस दिल की धड़कनों को समझ जाया करो ।।
कभी कभी....
दुनिया कुछ भी बोले हमको ,
तुम देते रहना साथ हरदम ।।
कसम हम मोहब्बत की खाते है ,,
साथ निभायेंगे हरदम , हरपल, हर जनम।।
जिस शहर में होगा आशियाना अपना ,,
उस शहर को अपना बनायेंगे।।
कसम है उस रब की ,,
तुमको न कभी छोड़कर जायेंगे ।।
साथ रहेंगे और साथ निभायेंगे ।।
कभी कभी....
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