कहानी इश्क़ की
ये कौन सी बात है??
तुम हो ही नहीं मेरे ।
फिर आयी ही क्यूं
इतने करीब तुम मेरे ।
बात गर नाराज़गी की होती
तो हम माफ़ भी कर देते ।
दिल पर गहरा ज़ख़्म करके
यूं पतझड़ सा न बनते ।
माना इश्क़ तुमसे किया हमने
ये तो जमाने की बात है ।
तुम तरस भी न खाओ
ये कौन सी बात है ?
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