बेरुखी

अजब सी बेरुखी है ,,
उनके बर्ताव में ।।
कांच के जैसे तोड़ देते है,,
दिल हमारा प्यार में ।।
कोई गीले शिकवे नहीं हैं,,
हम दोनों के प्यार में ।।
सांसे रुक जाती हैं ,,
इस मजधार में ।।

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